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नया साल आ गया

 नया साल आ गया-2021

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 नया साल आ गया -2021


जिंदगी की धार आगे बढ़ गई है ,
उम्र की रस्सी कहीं से मुड़ गई है
कुछ पुराने बंध टूटे हैं मगर,
नई गांठों से कहीं से जुड़ गई है.....

जो निकट थे कभी वे अब ,
अलविदा कह कर गए हैं ,
बहुत जो रिश्ते मुखर थे
मौन वे अब हो गए हैं ....

जगत का दस्तूर है यह ,
यही सब के साथ होगा ,
बावरे मन को बता दो
कई जनम का बोझ होगा ....

. आज का हमको पता है ,
कल कहां थे? अबूझा है,
और कल होंगे कहां अब
अंत का किसको पता है ?
अंत का किसको पता है?

टिप्पणियाँ

  1. अति सुन्दर , सहज। सही है , हम ना जाने कितने जन्मों बोझ उठाएं घूम रहे हैं। कल अबूझ है और आने वाला कल भी पूरी तरह अबूझ ,भविष्य के गर्भ ।पता नहीं कहां से आए और कहां को जाना है और इस जन्म का भी भोज आगे ढोना है।

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  2. इस जन्म को भी आगे ढोना है।

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